कानूनी पेचीदगियों पर मुस्कुराते अपराधी

भारत का संविधान विश्व का सबसे प्यारा एवं सुन्दर संविधान बताया जाता है लेकिन भारतीय दण्ड संहिता में इतनी पेचीदगियां हैं कि इसके चलते अपराधी अपरोक्ष रूप से लाभान्वित हो जाते हैं।

वर्तमान समय में झारखंड सहित पूरे देश में दुमका की बेटी की मौत पर बवाल मचा हुआ है, देश भर से लोग इस बिटिया की मौत से गुस्से में हैं। सभी लोग एक स्वर में हत्यारे के लिए फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं। इस जघन्य अपराध में पीड़ित बिटिया ने कैमरे के सामने अपना दर्द बयां कर समूचे विश्व समुदाय से अपने दर्द को अवगत कराया। पांच दिन तक रांची के रिम्स में मौत से लड़ने के बाद आखिरकार वह इस दुनिया को अलविदा बोल गई।

घटना दुमका के जरुआडीह मोहल्ले की है। आरोपी नाबालिग छात्रा को कई साल से परेशान कर रहा था वह उस पर शादी के लिए भी दबाव बना रहा था। 22 अगस्त की रात उसने पीड़ित लड़की को धमकी दी थी कि अगर वह उसकी बात नहीं मानी तो वह इस लड़की को मार देगा। लड़की ने अपने पिताजी को यह बात बताई तो उन्होंने कहा कि सुबह होने के बाद इस मामले का हल निकाला जाएगा। इस समस्या का कोई हल निकल पाता उससे पहले ही 23 अगस्त की सुबह आरोपी ने पेट्रोल छिड़ककर उस लड़की को मार डाला। एक नाबालिग लड़की को परेशान करने वाले एक दरिन्दे एवं उसके साथी के हौसले इतने बुलन्द थे कि उसने घर में घुसकर एक लड़की पर तेल डालकर उसे जला डाला।

पीड़िता के पिता एक किराना व्यवसायी हैं इसलिए उन्होंने पूर्व में कानूनी प्रक्रिया में उलझने के बजाय उस लड़के के परिजनों से शिकायत की थी लेकिन उसके बावजूद वह लड़का नहीं सुधरा। मध्यम वर्ग के लोग बिना किसी विवाद में पड़े शांतिपूर्ण तरीके से जीवन यापन करने के विश्वास रखते हैं क्योंकि ना तो उनकी बहुत सुनवाई हो पाती है ना ही वह बहुत प्रभावशाली होते हैं। इस मामले का हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए झारखंड के पुलिस महानिदेशक और दुमका एसपी को निर्देश दिया कि तत्काल पीड़िता के परिवार को सुरक्षा मुहैया कराया जाये, साथ ही कहा कि जल्द से जल्द अनुसंधान कर इस मामले में चार्जशीट दाखिल करें।

वर्तमान समय में युवाओं में अपराध को लेकर बहुत ही अधिक आकर्षण देखने को मिल रहा है और महिलाओं तथा बच्चियों के साथ दरिंदगी के मामले भी बढ़े हैं। ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी के लिए जिम्मेदार कहीं न कहीं से हमारा समाज एवं लम्बी कानूनी प्रक्रिया है। इस घटनाक्रम के आरोपी की पुलिस अभिरक्षा में जिस तरह मुस्कुराते हुए तस्वीर सामने आई वह वाकई भारतीय न्याय व्यवस्था पर चोट पहुंचाने वाली थी। न्यायालयों को ऐसे मामलों में सजा देकर ऐसी नजीर पेश करनी चाहिए कि मानवता के दुश्मनों का ऐसा कुकृत्य करने से पहले उसका अंजाम सोचकर कलेजा कांप जाए। ऐसे जघन्य अपराधों का जबतक समाज एकजुट होकर विरोध नहीं दर्ज कराएगा एवं अपराधियों का सामाजिक बहिष्कार नहीं होगा तबतक ऐसे अपराधियों का मनोबल कम नहीं होगा।


                              दिव्येन्दु राय
                         स्वतन्त्र टिप्पणीकार

                          @DivyenduRai

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