नई दिल्ली. वाणिज्य मंत्रालय ने सभी मांस और इसके उत्पादों को ‘हलाल प्रमाणित’ के रूप में निर्यात को लेकर दिशानिर्देश का मसौदा जारी किया है. इसके तहत इनका निर्यात तभी किया जायेगा, जब इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और पैकेट को लेकर वैध प्रमाणपत्र हो. यह प्रमाणपत्र भारतीय गुणवत्ता परिषद के बोर्ड से मान्यता प्राप्त निकाय जारी करेगा.

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने देश से मांस और मांस उत्पादों के निर्यात के लिए हलाल प्रमाणन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से हलाल प्रमाणन पर दिशानिर्देश के मसौदे का प्रस्ताव किया है.

दिशानिर्देश के मसौदे में कहा गया है कि प्रमाणन निकाय, भारतीय अनुरूपता मूल्यांकन योजना (आई-सीएएस) – हलाल के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन करेंगे. इसमें कहा गया है कि कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकार (एपीडा) को इस उद्देश्य के लिए समग्र निगरानी एजेंसी के रूप में नामित किया जाएगा.

17 फरवरी तक दे सकते हैं सुझाव

मसौदा दिशानिर्देश के अनुसार सभी मांस और मांस उत्पादों को ‘हलाल प्रमाणित’ के रूप में तभी निर्यात किया जायेगा, जब उसे वैध प्रमाणपत्र मिला हो. यह प्रमाणपत्र भारतीय गुणवत्ता परिषद से मान्यता प्राप्त प्रमाणन निकाय द्वारा जारी होना चाहिए. मसौदा दिशानिर्देश को जनता एवं उद्योग जगत के सुझाव के लिये जारी किया गया है. इस पर 17 फरवरी तक सुझाव और प्रतिक्रिया दिये जा सकते हैं.

क्या होता है हलाल मीट?

हलाल अरबी का शब्द है, जिसका मतलब होता है जायज़. इस्लाम में हलाल मीट ही खाने की मान्यता है. हलाल मीट के तहत किसी भी जानवर को एकदम से नहीं मार जाता है, बल्कि उसकी कुछ विशेष नसों को काट दिया जाता है. इससे शरीर का पूरा खून निकल जाता है और उसकी मौत हो जाती है. दावा किया जाता है कि इससे मरने वाले जानवर को कम तकलीफ होती है.

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