इस्‍लामाबाद। तालिबान और पाकिस्‍तानी सैनिकों के बीच ताजा संघर्ष की खबर सामने आई है। दोनों के बीच यह झड़प अफगानिस्तान के पक्त्या प्रांत के डांड-ए-पाटन इलाके में हुई है। रविवार की रात अफगान सीमा पर तालिबानी और पाकिस्‍तान के सैनिक भिड़ गए। पाकिस्‍तान मीडिया का दावा है कि इस गोलीबारी में सात लोग घायल हुए हैं। घायलों में बच्‍चे भी शामिल हैं। एजेंसी के मुताबिक तालिबान और पाकिस्‍तान सीमा पर हालात अब भी तनावपूर्ण हैं।

डूरंड लाइन को लेकर तालिबान और पाकिस्‍तान में तनाव

पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर रविवार को स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बता दें कि डूरंड लाइन पाकिस्तान और तालिबान हुकूमत के बीच तनाव की मुख्‍य वजह है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अफगानिस्तान के दक्षिण-पूर्वी में सीमा के दोनों ओर से सैन्य बलों ने एक-दूसरे पर गोलियां बरसाईं। इस गोलीबारी में कई लोग घायल हुए हैं। गौरतलब है कि पिछले वर्ष काबुल पर कब्जे के बाद से डूरंड रेखा को लेकर तालिबान और पाकिस्तान के बीच तनातनी चल रही है। अफगानिस्‍तान की तालिबान सरकार डूरंड रेखा को नहीं मानती है। इसलिए प्राय: दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प होती रहती है।

सघर्ष में एक पाकिस्तानी सैनिक की भी मौत

डान का दावा है क‍ि तालिबान की ओर से हुई गोलीबारी में सात लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो बच्चे और तीन सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। यह दावा किया जा रहा है कि इस संघर्ष में एक पाकिस्तानी सैनिक की भी मौत हुई है। इस संघर्ष में घायलों का सही आंकड़ा फिलहाल सामने नहीं आया है।

सीमा को लेकर तालिबान और पाकिस्‍तान में विवाद पुराना

अफगानिस्‍तान की सत्‍ता पर काबिज होने के बाद तालिबान और पाकिस्‍तान सेना के बीच सीमा व‍िवाद गहरा हुआ है। इसको लेकर तालिबान और पाक सेना के बीच कई बार संघर्ष हो चुका है। हाल में दक्षिणी स्पिन बोल्‍डक सीमा पर हथ‍ियारबंद व्‍यक्ति ने एक पाकिस्‍तानी सैनिक की हत्‍या कर दी थी। इसके बाद पाकिस्‍तान ने अपनी सीमा को बंद कर दिया था। पाकिस्‍तान सरकार ने उस संदिग्‍ध को पाकिस्‍तान को सौंपने की मांग की थी।

डूरंड लाइन को नहीं मानता तालिबान

उधर, पाकिस्तान डूरंड लाइन पर बाड़ भी लगा रहा है। तालिबान हुकूमत इसका कड़ा विरोध कर रही है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान के बहुसंख्यक पश्तून और तालिबान ने कभी भी डूरंड रेखा को आधिकारिक सीमा रेखा नहीं मानता है। अफगानिस्तान सीमा के समीप रहने वाले पश्तूनों का आरोप है कि इस लाइन ने उनके घरों का बंटवारा कर दिया है। वह पिछले सौ वर्षों से उस इलाके में अपने परिवार और कबीले के साथ रहते थे, लेकिन अंग्रेजों ने एक चाल के तहत पश्तून बहुल इलाकों के बीच से यह लाइन खींची।

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